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शिव चालीसा से होगा मंगल: जय गणेश गिरिजा सुवन , मंगल मूल सुजान । कहत अयोध्यादास तुम , देउ अभय वरदान ।।

इसके पश्चात् शिवजी को चन्दन का टीका लगाकर चावल अर्पण करके शिवजी के सम्मुख शीश झुकाएं । फिर शिव चालीसा का पाठ प्रारम्भ करें । पाठ पूर्ण होने पर “ ॐ नमः शिवाय " मंत्र का १०८ बार सफेद चन्दन या रुद्राक्ष की माला से जाप करें ।

असम न्यूज डेस्क (T.S.K) : नमस्ते दोस्तो नमस्कार महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं! आप सभी को। 

शिव चालीसा से होगा मंगल: जय गणेश गिरिजा सुवन , मंगल मूल सुजान । कहत अयोध्यादास तुम , देउ अभय वरदान ।।
शिव चालीसा से होगा मंगल: जय गणेश गिरिजा सुवन , मंगल मूल सुजान । कहत अयोध्यादास तुम , देउ अभय वरदान ।।


शिव चालीसा से होगा मंगल: जय गणेश गिरिजा सुवन , मंगल मूल सुजान । कहत अयोध्यादास तुम , देउ अभय वरदान ।।

तुम सर्वप्रथम शिव चालीसा की रचना करने वाले अयोध्या दासजी गणेश जी की वन्दना करते हुए कहते हैं कि हे माता पार्वती के पुत्र गणेश जी ! आपकी जय हो । आप सभी शुभ कार्यों की सफलता के प्रतीक माने गए हैं । अतः हे पूज्यदेव गणेश जी आप हमें भी ऐसा अभय वरदान दीजिए कि मेरा यह शुभ कार्य निर्विघ्न पूर्ण हो जाए ।

शिव चालीसा से होगा मंगल: जय गिरिजापति दीनदयाला । सदा करत सन्तन प्रतिपाल।।

हे माता पार्वतीजी के स्वामी ! आपकी जय हो । हे प्रभु आप दीन व दुःखी लोगों पर हमेशा दया की दृष्टि रखते हैं और साधु - सन्तजनों की रक्षा करते हैं ।

शिव चालीसा से होगा मंगल: भाल चंद्रमा सोहत नीके। कानन कुण्डल नागफनी के।।

आपके मस्तक पर चन्द्रमा शोभित है और कानों में नागफनी के कुण्डल सुशोभित हैं ।

शिव चालीसा से होगा मंगल: अंग गौर सिर गंग बहाए। मुण्डमाल तन 

आपके शरीर का रंग गौर वर्ण है। आपके सिर की जटाओं में से गंगाजी की धारा बह रही है। आपके गले में मुण्ड की माला है और शरीर पर भस्म की भभूति लगाए हुए हैं।

शिव चालीसा से होगा मंगल:वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे। छवि को देखि नाग मुनि मोहे॥

वस्त्र के रूप में आपके शरीर पर बाघ की खाल सुशोभित हो रही है। आपकी ऐसी सुन्दर छवि को देखकर नाग और मुनिजन मोहित हो रहे हैं।

शिव चालीसा से होगा मंगल: मैना मातु कि हवै दुलारी। वाम अंग सोहत छवि न्यारी।।

माता मैना की प्रिय पुत्री पार्वती जी आपके बाईं ओर सुशोभित हैं जिनकी शोभा दर्शनीय है।