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Mahashivratri 2022: इस दिन है महाशिवरात्रि, भगवान भोलेनाथ की पूजा करते समय यह बातों का रखें खास ध्यान | वह सब कुछ जो आपको जनना आवश्यक है Mahashivratri 2022 पर क्या करें और क्या ना करें

श्री गिरिजापति वंदिकर, चरण मध्य शिरनाय। कहत अयोध्यादास तुम, मो पर होहु सहाय ॥ हे पार्वतीनाथ भगवान् शंकर, अयोध्यादास जी आपके चरणों में शीश नवाकर प्रार्थना करते हैं कि आप मेरी सहायता करें।

देवों के देव महादेव को प्रसन्न करने हेतु महाशिवरात्रि 2022 पर वह सब कुछ जो आपको जनना आवश्यक है Mahashivratri 2022 पर क्या करें और क्या ना करें, मनचाहा फल प्राप्त करने के लिए विधि पूर्वक करें पूजा आइए जानते हे।

वह सब कुछ जो आपको जनना आवश्यक है Mahashivratri 2022 पर क्या करें और क्या ना करें

Mahashivratri 2022


Mahashivratri 2022 मनाने का आधुनिक तरीका: महाशिवरात्रि की खास विशेष और मैसेजेस भेजें अपने परिजनों को

MAHASHIVRATRI 2022: महाशिवरात्रि पूजा के लिए हो जाएं तैयार.. यह हे महादेव को प्रेम करने का तरीका
असम न्यूज डेस्क (T.S.K) : देवों के देव महादेव शिवरात्रि पर विधि विधान पूर्वक पूजा करने से होती है मनचाहा फल प्राप्त। नमस्ते दोस्तो नमस्कार महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं! आप सभी को। 

इस खास तरीके से करें शिव जी की पूजा, महाशिवरात्रि पर पूरी हो जाएगी हर मनोकामना: महाशिवरात्रि की खास विशेष और मैसेजेस भेजें अपने परिजनों को

रूद्र अभिषेक पूजा Mahashivratri 2022: कल है महाशिवरात्रि, जानें कैसे करें शिव की आराधना,देखें पूजा विधि,शुभ मुहूर्त और आरती

Maha Shivratri 2022 महाशिवरात्रि कल, यहां जानिए व्रत विधि, उपवास के नियम, पूजा विधि समेत हर जानकारी: महाशिवरात्रि पूजा के लिए हो जाएं तैयार.. यह हे महादेव को प्रेम करने का तरीका

भारत में त्योहारों में से अधिक पसंद करने वाला और शुभ माना जाता है महाशिवरात्रि को परम परमेश्वर जगत के विधाता और महा शिव शक्ति में जो है अब्बल जिनको हम कहते हैं परमपिता शिव, कोई कहता है नीलकंठ, यह दिन धरती वासियों के लिए खास इसलिए है यह दिन परमेश्वर जी की महान रात है। 2022 में 1 मार्च को बड़े उत्साह के साथ मनाया जाएगा "महाशिवरात्रि"

इस खास तरीके से करें शिव जी की पूजा, महाशिवरात्रि पर पूरी हो जाएगी हर मनोकामना: महाशिवरात्रि की खास विशेष और मैसेजेस भेजें अपने परिजनों को


पूरे देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं! इस महा शिवरात्रि के दिन हमने आपके लिए पूरे इंटरनेट पर सर्च करके अमूल्य "महाशिवरात्रि 2022 विशेष और मैसेजेस" उपहार के तौर पर लाए हैं। इसे अपने परिजनों या दोस्तों को व्हाट्सएप के जरिए भेज सकते हैं ओम नमः शिवाय।

१. हे परमपिता परमेश्वर मैं आपके आगे हाथ जोड़कर विनती करता हूं इस पूरे संसार के लोगों को जीने की राह दिखाई और सब को खुशी प्रदान करें ॐ ओम नमः शिवाय। - happy mahashivratri 2022

२. आओ दोस्तों मिलकर नीलकंठ जी की आराधना करें और कहे जो इस धरती पर दुखी है उसे खुशी प्रदान करें ओम नमः शिवाय।

३. हे मेरे दयालु शिव दुख की घड़ी को पार करके सुख की घड़ी की स्थापना करें ओम नमः शिवाय। - happy mahashivratri 2022

४. ओह मेरे भोला है भंडारी करे नंदी की सवारी शंभू नाथ रे ओ शंभू नाथ रे। 

५. हे मेरे भोले नाथ मुझे और मेरे दोस्तों ,परिवारों को सही राह प्रधान करो ओम नमः शिवाय।

रूद्र अभिषेक पूजा Mahashivratri 2022: कल है महाशिवरात्रि, जानें कैसे करें शिव की आराधना,देखें पूजा विधि,शुभ मुहूर्त और आरती


हिंदू धर्म के अनुसार रुद्राभिषेक पूजा एक अनमोल स्थान है, फूल और अनमोल पूजा वस्तु के साथ रुद्राभिषेक शिव को पवित्र स्थान करा कर की जाती है। हिंदू धर्म में सबसे ऊंचे स्थान में परमपिता शिव को माना जाता है और महानतम ईश्वर जिनका नाम का अर्थ है "महादेव" महाशिवरात्रि हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है महाशिवरात्रि फागुन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है, और मान्यता के अनुसार यह दिन शिव और पार्वती का विवाह का दिन है।

परमपिता परमेश्वर शिव के काई नाम है कोई उन्हें नीलकंठ, बाबा, महादेव, संकर, भोले नाथ और पसंदीदा नाम है रूद्र भगवान शिव। वेदों के अनुसार रूद्र शब्द का अर्थ आक्रामक और विनाशकारी पक्षा पर केंद्रित है। उदाहरण के तौर पर रूद्र तांडव नृत्य परमपिता परमेश्वर जी शिव के स्वभाव के निर्दई पक्ष का उदाहरण है।

पूजा के क्षेत्र में शिव लिंग को थाली में रखें। तेल या घी से एक दीपक (दीया) जलाएं और इसे शिव लिंग के दाईं ओर रखें। पूजा की सभी सामग्री को एक ट्रे में सजाएं और आराम से पूर्व की ओर मुंह करके बैठ जाएं। सीधे फर्श पर बैठने से बचने के लिए आसन का प्रयोग करें।

रुद्राभिषेक करते समय पुरुषों और महिलाओं दोनों को स्वच्छ जातीय कपड़े पहनने चाहिए। ओम नारायणाय नमः आदि जैसे धार्मिक मंत्रों का उच्चारण करते हुए हिंदू धर्म में एक शुद्धिकरण अनुष्ठान, आचमन्य करें। पूजा शुरू करने से पहले भगवान गणेश, भगवान इंद्र और अपने कुल देवता का आशीर्वाद लें।

ओम नमः शिवाय का जाप करते हुए बेल पत्र चढ़ाएं और दीपक को फूल और अक्षत चढ़ाएं। अब धीरे से शिव लिंग को अनुष्ठान क्षेत्र से एक खुली जगह या ट्रे में ले जाएं और लिंग को बेल पत्र पर रखें ताकि रुद्राभिषेक आसानी से शुरू हो सके। रुद्राभिषेक की शुरुआत 'O नमः शिवाय' का जाप करते हुए कुछ जल चढ़ाकर करें।

फिर धीरे से शिव लिंग पर पंचामृत डालें। चंदन और जल अर्पित करें। फूल और कच्चा दूध चढ़ाएं और उसके बाद गंगाजल या जल चढ़ाएं।अब शिव लिंग को साफ और पोंछ लें और बेल पत्र पर अपने मूल सिंहासन पर वापस ले जाएं। वस्त्र, जनेऊ अर्पित करें और अपनी दाहिनी उंगली से चंदन लगाएं।

धूप जलाएं, उसके बाद दीपक या दीया जलाएं और घंटी बजाते हुए भस्म, बेल पत्र, दूर्वा, फूलों की वर्षा करें। फिर अपना हाथ साफ करें और फल, पान, सुपारी, लौंग और इलाइची, दक्षिणा आदि अर्पित करें।
रुद्राभिषेक के दौरान Om नमः शिवाय का जाप करते रहें। आप महा मृत्युंजय मंत्र का जाप भी कर सकते हैं। कपूर (कपूर) के साथ पूजा करें और फिर परिक्रमा करें और भगवान शिव को फूलों और नमन से आशीर्वाद देकर पूजा समाप्त करें।

Maha Shivratri 2022 महाशिवरात्रि कल, यहां जानिए व्रत विधि, उपवास के नियम, पूजा विधि समेत हर जानकारी: महाशिवरात्रि पूजा के लिए हो जाएं तैयार.. यह हे महादेव को प्रेम करने का तरीका


सूर्योदय से पहले उठकर नित्य की भांति नित्यकर्म से निवृत्त होकर , शुद्ध जल से स्नान कर , शुद्ध वस्त्र धारण कर भगवान शिवजी की मूर्ति के सामने पालथी मारकर आसन पर बैठ जाएं । पुस्तक में बने प्रभावशाली शिव मन्त्र एवं पूजन सामग्री- सफेद चन्दन , चावल के दाने , धतूरे के सफेद पुष्प , बेलपत्र , भांग , दूब तथा धूप - दीप को एक थाल में सजाकर सामने रखें । अब मन में शिव भगवान् का स्मरण करते हुए धूप और दीपक प्रज्ज्वलित कर शिव जी के सम्मुख रखें । फिर निम्न श्लोक पढ़कर सफेद पुष्प शिवजी को समर्पित करें : 

             कर्पूर गौर करुणावतार , संसार सारं भुजगेन्द्र हारम् । 
                          सदा वसन्तं हृदयारविन्दे , भवं भवानी सहितं नमामि ॥
इसके पश्चात् शिवजी को चन्दन का टीका लगाकर चावल अर्पण करके शिवजी के सम्मुख शीश झुकाएं । फिर शिव चालीसा का पाठ प्रारम्भ करें । पाठ पूर्ण होने पर “ ॐ नमः शिवाय " मंत्र का १०८ बार सफेद चन्दन या रुद्राक्ष की माला से जाप करें । 

शिव चालीसा से होगा मंगल: जय गणेश गिरिजा सुवन , मंगल मूल सुजान । कहत अयोध्यादास तुम , देउ अभय वरदान ।।


इसके पश्चात् शिवजी को चन्दन का टीका लगाकर चावल अर्पण करके शिवजी के सम्मुख शीश झुकाएं । फिर शिव चालीसा का पाठ प्रारम्भ करें । पाठ पूर्ण होने पर “ ॐ नमः शिवाय " मंत्र का १०८ बार सफेद चन्दन या रुद्राक्ष की माला से जाप करें ।

इस बार मंगलवार को पड़ रही महाशिवरात्रि, खास योग पर जानें पूजा करने की विधि


शिव चालीसा से होगा मंगल: जय गणेश गिरिजा सुवन , मंगल मूल सुजान । कहत अयोध्यादास तुम , देउ अभय वरदान ।।

तुम सर्वप्रथम शिव चालीसा की रचना करने वाले अयोध्या दासजी गणेश जी की वन्दना करते हुए कहते हैं कि हे माता पार्वती के पुत्र गणेश जी ! आपकी जय हो । आप सभी शुभ कार्यों की सफलता के प्रतीक माने गए हैं । अतः हे पूज्यदेव गणेश जी आप हमें भी ऐसा अभय वरदान दीजिए कि मेरा यह शुभ कार्य निर्विघ्न पूर्ण हो जाए ।

शिव चालीसा से होगा मंगल: जय गिरिजापति दीनदयाला । सदा करत सन्तन प्रतिपाल।।

हे माता पार्वतीजी के स्वामी ! आपकी जय हो । हे प्रभु आप दीन व दुःखी लोगों पर हमेशा दया की दृष्टि रखते हैं और साधु - सन्तजनों की रक्षा करते हैं ।

शिव चालीसा से होगा मंगल: भाल चंद्रमा सोहत नीके। कानन कुण्डल नागफनी के।।

आपके मस्तक पर चन्द्रमा शोभित है और कानों में नागफनी के कुण्डल सुशोभित हैं ।

शिव चालीसा से होगा मंगल: अंग गौर सिर गंग बहाए। मुण्डमाल तन 

आपके शरीर का रंग गौर वर्ण है। आपके सिर की जटाओं में से गंगाजी की धारा बह रही है। आपके गले में मुण्ड की माला है और शरीर पर भस्म की भभूति लगाए हुए हैं।

शिव चालीसा से होगा मंगल:वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे। छवि को देखि नाग मुनि मोहे॥

वस्त्र के रूप में आपके शरीर पर बाघ की खाल सुशोभित हो रही है। आपकी ऐसी सुन्दर छवि को देखकर नाग और मुनिजन मोहित हो रहे हैं।

शिव चालीसा से होगा मंगल: मैना मातु कि हवै दुलारी। वाम अंग सोहत छवि न्यारी।।

माता मैना की प्रिय पुत्री पार्वती जी आपके बाईं ओर सुशोभित हैं जिनकी शोभा दर्शनीय है।

It's Me �� Pradip Sharma ,,, it was being stuck in a dead-end job working for a micro-managing supervisor. There was an incident at work where my supervisor overstepped his bounds. He did somethi…

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