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Buddha Purnima 2022: बुद्ध पूर्णिमा के दिन भगवान बुद्ध की वाणी पड़े, तिथि, समय, महत्व को जाने और वेसाक दिवस की शुभकामनाएं बधाई

बुद्ध पूर्णिमा प्रतिवर्ष अप्रैल या मई में बैसाख महीने की पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। इस साल 15 मई (रविवार) को मनाया जाएगा

 बुद्धं शरणं गच्छामि।


धम्मं शरणं गच्छामि।


संघं शरणं गच्छामि।


मैं बुद्ध की शरण में जाता हूँ।


मैं धर्म की शरण में जाता हूँ।


हे अनन्त जीवन!


हे परम मृत्यु !


मै तुम्हारी शरण में आया हूँ।


तुम्हारी अग्नि से मुझे अपने निर्वापित दीप को जलाने दो!


मेरे भ्रू पर अपनी महिमा चिह्नित करके तुम मेरी लज्जा को सर्वदा के लिए मिटा दो।


तुम्हारे चरण रूपान्तरकारी अग्नि हैं जो मेरी खोट को स्वर्ण बना देगी। मेरे भीतर की सारी कलौंस आग में भस्मीभूत हो जाए, और भ्रमजाल विदीर्ण हो उठे।


- रवीन्द्रनाथ ठाकुर



Buddha Purnima 2022: प्रति वर्ष की तरह इस बार १६ मई २०२२ (16 May 2022) को बुद्धा पूर्णिमा मनाया जाएगी। वैशाख महीने की पूर्णिमा तिथि को यह दिन पड़ता है। हमने इस लेख में बताया है बुद्ध पूर्णिमा के दिन भगवान बुद्ध की वाणी पड़े, तिथि, समय, महत्व को जाने। बुद्ध पूर्णिमा 2022: बुद्ध जयंती या बुद्ध पूर्णिमा को वैशाख, वेसाक और बुद्ध के जन्मदिन के रूप में भी जाना जाता है। बुद्ध पूर्णिमा प्रतिवर्ष अप्रैल या मई में बैसाख महीने की पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। इस साल 15 मई (रविवार) को मनाया जाएगा या 16 मई (सोमवार) को इसे लेकर काफी कंफ्यूजन है। बुद्ध पूर्णिमा, जिस दिन गौतम बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी, इस वर्ष सोमवार, 16 मई को मनाया जाएगा। योगिक संस्कृति के अनुसार, बुद्ध पूर्णिमा को एक महत्वपूर्ण दिन माना जाता है क्योंकि यह तीसरी पूर्णिमा (पूर्णिमा) है, जब पृथ्वी सूर्य के उत्तरी भाग में चली जाती है। यह वह दिन भी है जब गौतम बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी।


Buddha Purnima 2022: बुद्ध पूर्णिमा के दिन भगवान बुद्ध की वाणी पड़े

Buddha Purnima 2022:भगवान बुद्ध की वाणी, तिथि, समय, महत्व वेसाक दिवस की शुभकामनाएं बधाई
Buddha Purnima 2022:भगवान बुद्ध की वाणी, तिथि, समय, महत्व वेसाक दिवस की शुभकामनाएं बधाई



"स्वप्न से जाग और व्यर्थ कालक्षेप मत कर, तू अपना मन सत्य की ओर अनावृत कर । धर्माचरण कर और तू परम निर्वाण को पा लेगा।"


* जो भी आर्य अष्टांगिक मार्ग पर चलते हैं, उनमें से प्रत्येक धार्मिक जीवन के आनन्द की प्राप्ति कर सकता है। जो धन से लिपटा हुआ है, उसके लिए यही अच्छा है कि अपने हृदय को उससे विषाक्त करने के बदले उसका परित्याग कर दे; किन्तु जो धन से लिपटा हुआ नहीं है और जिसके पास सम्पदा है तथा जो उसका सम्यक् उपयोग करता है, वह अपने सहगामी बन्धुओं के लिए वरदानस्वरूप हो जाएगा।


* मैं तुझसे कहता हूँ कि तू जीवन के अपने व्यवसाय में स्थित रह और अपने कर्म को परिश्रमपूर्वक सम्पन्न कर। जीवन, धन और शक्ति पुरुष को नहीं बाँधते, बल्कि जीवन, धन और शक्ति के प्रति आसक्ति ही उसे बाँध लेती है।


* तथागत के धर्म के लिए व्यक्ति का अनिकेत होना, या संसार से विरत होना तब तक आवश्यक नहीं, जब तक स्वयं वह ऐसा करने की प्रेरणा नहीं पाता; परन्तु तथागत के धर्म के लिए यह आवश्यक है कि प्रत्येक व्यक्ति स्व भ्रम से मुक्त हो जाए, अपने हृदय का परिमार्जन करे, सुख के प्रति अपनी तृष्णा का परित्याग करे और सदाचार का जीवन व्यतीत करे।


* हमारे शुभ और अशुभ कर्म छाया के समान हमारा अनुसरण करते हैं।


* वे सब, , जो विवेकी है, शरीर के सुखों की अवहेलना करते हैं। वे काम की उपेक्षा करते हैं तथा अपने आध्यात्मिक अस्तित्व को विकसित करने की चेष्टा करते है।


* उपदेशक को स्फूर्ति और उल्हासपूर्ण आशा से परिपूर्ण होना चाहिए। उसे कभी थकना नहीं चाहिए और कभी भी अन्तिम सफलता से निराश नहीं होना चाहिए।


* उसे झगड़ालू विवादों में हर्षित नहीं होना चाहिए और न उसे अपनी प्रतिभा की उच्चता सिद्ध करने के लिए विरोधाभासों में ही पड़ना चाहिए, प्रत्युत उसे स्थिर एवं शांत होना चाहिए।


* उसके हृदय में कभी भी उग्र विचार न रहें और उसे समस्त प्राणियों के प्रति परोपकार की प्रवृत्ति का परित्याग कभी भी नहीं करना चाहिए।


* जब तक लोग सत्य-वचनों की ओर ध्यान न दे, तब तक उपदेशक को यह जानना चाहिए कि उसे उनके हृदयों में अधिक गहराई तक पहुँचना होगा; परन्तु जब वे उसके शब्दों पर ध्यान देने लगें, तो उसे आशा करनी चाहिए कि शीघ्र ही वे बोध को प्राप्त करेंगे।


* हे भद्रवंशीय शिक्षित जनो, तुम लोग जिन्होंने तथागत के वचनों का प्रचार करने का व्रत लिया है, तुम्हारे हाथों में महाभाग सत्य के सद्धर्म को हस्तान्तरित करते, सौंपते और समाविष्ट करते है।


* सत्य के सद्धर्म को ग्रहण करो, इसे रक्षित करो, इसे पढ़ो, और पुनः पढ़ो, इसकी थाह लो, इसे प्रकाशित करो तथा विश्व के सभी भागों के समस्त प्राणियों में इसका प्रचार करो।


* तथागत लोभी नहीं है और न संकीर्ण मनवाला है। वह उन सभी को पूर्ण बुद्ध-ज्ञान प्रदान करने के लिए सहमत है, जो उसे ग्रहण करना चाहते हैं। तुम उसके समान बनो और सत्य को मुक्त हस्त से प्रदान करने, प्रदर्शित करने और अर्पित करने में उसके उदाहरण का अनुकरण करो।


Buddha Purnima 2022: तिथि, समय


बुद्ध पूर्णिमा पूजा की तिथि रविवार को दोपहर 12:45 बजे शुरू होने की उम्मीद है और सोमवार को सुबह 9:43 बजे समाप्त होगी।


Buddha Purnima 2022: महत्व


ऐसा माना जाता है कि बुद्ध पूर्णिमा के दिन गौतम बुद्ध के जीवन में तीन बड़ी घटनाएं घटी थीं। सबसे पहले, उनका जन्म लुंबिनी में सिद्धार्थ गौतम के रूप में हुआ था। दूसरा, उन्होंने बोधि वृक्ष की छाया में ज्ञान प्राप्त किया। और तीसरा, कई वर्षों तक अध्यापन के बाद, गौतम बुद्ध का कुशीनारा में निधन हो गया, जब वे अस्सी वर्ष के थे।


भगवान बुद्ध ने धर्म (कर्तव्य), सद्भाव, अहिंसा और दया का उपदेश दिया। 30 वर्ष की आयु में, गौतम बुद्ध ने सत्य की खोज में जीवन व्यतीत करने के लिए अपनी सांसारिक संपत्ति और रियासत को छोड़ दिया। उसने स्वयं को कष्ट से मुक्त करने की आशा में तपस्या करने के लिए भी ऐसा किया।


Buddha Purnima 2022: बुद्ध पूर्णिमा की तस्वीरें और वेसाक दिवस की शुभकामनाएं बधाई


Buddha Purnima 2022 शुभकामनाएं बधाई: रोशनी के विस्फोट में, उन्होंने अस्तित्व का अर्थ खोजा और इस प्रकार भगवान बुद्ध बन गए।  हैप्पी बुद्ध पूर्णिमा, सब लोग।


Buddha Purnima 2022 शुभकामनाएं बधाई: आइए हम दुनिया को हर इंसान के लिए एक बेहतर जगह बनाने के लिए भगवान बुद्ध की शिक्षाओं और ईश्वरीय मार्गदर्शन से जीते हैं।  बुद्ध जयंती की शुभकामनाएं।


Buddha Purnima 2022 शुभकामनाएं बधाई: बुद्ध पूर्णिमा पर, यहां भेजा जा रहा है प्यार, शांति, सकारात्मक वाइब्स, खुशी, अच्छा स्वास्थ्य और समृद्धि।  हैप्पी वेसाकी


Buddha Purnima 2022 शुभकामनाएं बधाई: स्वास्थ्य एक महान आशीर्वाद है, संतोष एक महान धन है, विश्वास एक अच्छा बंधन है।  हैप्पी बुद्ध जयंती


Buddha Purnima 2022 शुभकामनाएं बधाई: आपका दिमाग एक शक्तिशाली चीज है।  जब आप इसे सकारात्मक विचारों के साथ छानना शुरू करेंगे तो आपका जीवन बदलना शुरू हो जाएगा।

It's Me �� Pradip Sharma ,,, it was being stuck in a dead-end job working for a micro-managing supervisor. There was an incident at work where my supervisor overstepped his bounds. He did somethi…

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